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जनजातीय गौरव के प्रति नई चेतना का हो रहा है संचार : राष्ट्रपति 

राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क

भगवान बिरसा मुंडा एक प्रमुख आदिवासी नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक प्रमुख विद्रोह का नेतृत्व किया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर ‘धरती आबा’ की याद को सम्मानित करते हुए देशवासियों को बधाई दी।

यह जनजातीय गौरव दिवस एक साल भर चलने वाले उत्सव का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा के योगदान और उनके कार्यों को याद करना है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश के सभी नागरिक इस महत्वपूर्ण दिन को मनाने के लिए एकजुट होने के लिए प्रोत्साहित किया है। 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि 2021 से भारत सरकार ने प्रत्‍येक वर्ष 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मनाने की परंपरा का प्रतिपादन किया है। जनजातीय समुदाय के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए इस निर्णय से बेतहत कदम दूसरा कोई और नहीं हो सकता है। हमारे गुमनाम जनजातीय नायकों की स्मृति में देश के विभिन्न हिस्‍सों में संग्रहालयों का निर्माण करवाया जा रहा है। रांची में निर्मित भगवान बिरसा मुंडा का संग्रहालय एक तीर्थ स्थल की भांति सम्मानित हो गया है। वहीं ‘जनजातीय दर्पण’ नामक संग्रहालय राष्ट्रपति भवन में भी विकसित किया गया है।

उन्होंने कहा श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में जनजातीय भाषा ‘संथाली’ को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के प्रयासों में मेरा भी योगदान था।