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शिक्षा- भाषा

हिन्दी दिवस पर राष्ट्रोक्ति, अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन व हिम उत्तरायणी द्वारा संगोष्ठी का आयोजन

विविध, शिक्षा- भाषा
 विशिष्ट हिन्दी सेवा और शिक्षक सम्मान से कई शिक्षाविद् सम्मानित राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क : दक्षिण दिल्ली के कैलाशपुरी, पालम स्थित सामुदायिक भवन में हिन्दी दिवस के अवसर पर राष्ट्रोक्ति वेब पोर्टल, अन्तर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन और हिम उत्तरायणी पत्रिका द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विषय प्रवर्तन करते हुए हिम उत्तरायणी पत्रिका की संपादक और दिल्ली विश्वविद्यालय में संस्कृत की प्राध्यापिका प्रो. सुषमा चौधरी ने कहा कि हिन्दी भारत की समृद्ध संस्कृति, समुन्नत परंपरा और निरंतर गतिमान समाज की सशक्त अभिव्यक्ति है। हिन्दी हमारे इतिहास और विजय गाथा का मुखर स्वर है, यह हिन्दी अब सात समंदर पार तक व्याप्त वैश्विक हिन्दी की भूमिका में है। समारोह के वरेण्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार और नागरी लिपि परिषद के महासचिव डॉ. हरि सिंह पाल ने कहा कि हमारी स्वतंत्रता, एकता और सांस्कृतिक पहचान को ...
मैं तो हिन्दी के बिना जी नहीं सकता -प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी

मैं तो हिन्दी के बिना जी नहीं सकता -प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी

विविध, शिक्षा- भाषा
इन दिनों हम सब अपनी -अपनी भाषा के दुखों में फंसे हुए हैं। यह सड़े हुए आदमी का दुख है। नकली दुख है। यह भाषा प्रेम नहीं, भाषायी ढ़ोंग है। यह भाषायी पिछड़ापन है। इसके कारण हम समग्रता में भाषा के सामने उपस्थित संकट को देख ही नहीं पा रहे।हमारे लिए आज महत्वपूर्ण यह नहीं है कि भाषा और समाज का अलगाव कैसे दूर करें,हमारे लिए जरूरी हो गया है कि सरकारी भाषा की सूची में अपनी भाषा को कैसे बिठाएं। सरकारी भाषा का पद जीवन की भाषा के पद से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है और यही वह बुनियादी घटिया समझ है जिसने हमें अंधभाषा प्रेमी बना दिया है। हिन्दीवाला बना दिया है। यह भावबोध सबसे घटिया भावबोध है। यह भावबोध भाषा विशेष के श्रेष्ठत्व पर टिका है। हम जब हिन्दी को या किसी भी भाषा को सरकारी भाषा बनाने की बात करते हैं तो भाषाय़ी असमानता की हिमायत कर रहे होते हैं। हमारे लिए सभी भाषाएं और बोलियां समान हैं और सबके हक समान ह...
पहले साहित्य में, फिर धरातल पर हुआ था देश का विभाजन  – मनोज कुमार

पहले साहित्य में, फिर धरातल पर हुआ था देश का विभाजन – मनोज कुमार

शिक्षा- भाषा
वंदेमातरम गीत के विभाजन को स्वीकार कर भारत विभाजन की नींव रख दी गई थी, देश का विभाजन बाद में हुआ, उससे पहले विचारों में विभाजन हो गया था। परंतु विभाजन के जितने जिम्मेदार गांधी थे, उतने ही जिम्मेदार अंग्रेज, तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व एवं उस समय का समाज भी था। भारत विभाजन की पृष्ठभूमि में अंग्रेजों द्वारा स्थापित तीन संस्थाएं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, मुस्लिम लीग एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी थी। यह विचार अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सह-संगठन मंत्री मनोज कुमार ने व्यक्त किए। वे साहित्य परिषद, जयपुर इकाई द्वारा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज के सभागार में आयोजित परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे। पिछले पाँच-छह दशकों में भारत विभाजन के विषय पर पर्याप्त साहित्य सभी विधाओं में सृजित हुआ है। प्रमुख रूप से इसके तीन प्रकार हैं, एक विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित; दूसरा विभाजन के द...
कालजयी रचनाकार और उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द!

कालजयी रचनाकार और उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द!

टॉप स्टोरीज, शिक्षा- भाषा
प्रेमचन्द का पहला लिखा उपन्यास देवस्थान रहस्य जब प्रेमचन्‍द को ब्रिटिश सरकार का कोप भाजन बनना पड़ा प्रेमचन्द का साहित्यिक जीवन उनके साहित्य में है कथा साहित्य का सम्राट और उपन्यास सम्राट जैसे अलंकरण से पुकारे गए प्रेमचन्द
भारतीय दृष्टि के आधार पर शिक्षा में नए विकल्प की आवश्यकता : सरसंघचालक जी

भारतीय दृष्टि के आधार पर शिक्षा में नए विकल्प की आवश्यकता : सरसंघचालक जी

शिक्षा- भाषा
केरल, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की राष्ट्रीय चिंतन बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हम सब जिस शिक्षा से निकले हैं, वह शिक्षा औपनिवेशिक प्रभाव से ग्रस्त थी और हमें भारतीय दृष्टि के आधार पर शिक्षा में नए विकल्प देने की आवश्यकता है, इसलिए हमें स्वयं को वैसा तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता स्वयं को योग्य बनाएं, अपना उदाहरण रखें और अपनी दोस्ती रख कर कार्यकर्ता को अपने जैसा बनाएँ, इसलिए कार्यकर्ताओं का नियमित प्रशिक्षण ज़रूरी है। इन सभी के लिए समन्वय ज़रूरी है, समन्वय का दायरा व्यक्ति से विश्व तक का होता है, हमें सबके साथ परस्पर मिलकर चलना है। समन्वय रखने के लिए धैर्य चाहिए, दूसरों को समझने का स्वभाव चाहिए, अपनापन चाहिए। समन्वय से ही संगठन का विस्तार होता है। शिक्षा के सभी घटकों को हमें जोड़ना है न्यास के सचिव डॉ. अतुल...
हिंदुत्व के साथ देश में बनाएं संस्कृतमय वातावरण

हिंदुत्व के साथ देश में बनाएं संस्कृतमय वातावरण

शिक्षा- भाषा
राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क नई दिल्ली! आज विश्वभर में भारत अंतरिक्ष से लेकर अर्थजगत और सामरिक शक्ति से लेकर सांस्कृतिक पहचान को प्रमाणित कर रहा है,यह गौरवमय कालखंड है। गौ, गंगा, वेद और संस्कृत की रक्षा के लिए आवश्यक है कि हम घर-घर और जन जन-जन तक संस्कृत भाषा को पहुंचाएं, मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारे इस अखिल भारतीय संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण वर्ग से निकले शिक्षक इस मिशन को साकार करेंगे। ये विचार नई दिल्ली स्थित वसंत विहार के ललित महाजन सरस्वती बाल विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विहिप के संस्कृत आयाम द्वारा संचालित 10 दिवसीय अखिल भारतीय संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण वर्ग के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विहिप के संरक्षक, अशोक सिंहल वैदिक विज्ञान शोध संस्थान के अध्यक्ष और संस्कृत आयाम के पालक अधिकारी श्री दिनेश चंद्र ने व्यक्त किए। समारोह की अध्यक्षता करते हुए वर्गाधिक...
उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को किया जाए भंग, NCPCR ने सभी राज्यों के CS को लिखा पत्र

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को किया जाए भंग, NCPCR ने सभी राज्यों के CS को लिखा पत्र

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मदसरों में पढ़ रहे बच्चों को दूसरे स्कूलों में दिलाया जाए दाखिला   राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क :  उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को भंग करने की सिफारिश करते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है। आयोग ने बच्चों को औपचारिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ने के लिए मदरसा बोर्ड को बंद किये जाने का आग्रह किया है। मदरसों में पढ़ रहे बच्चों को दूसरे स्कूलों में दाखिला कराने की भी सिफारिश की है। NCPCR ने बच्चों के मौलिक अधिकारों और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों के बीच उत्पन्न विरोधाभास पर गहन चिंता व्यक्त की है। बच्चों को केवल धार्मिक संस्थानों में भेजने से उन्हें राइट टू एजुकेशन (RTE) अधिनियम 2009 के तहत मिलने वाले अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा करते हैं, लेकिन इसका यह मतलब न...
मराठी, बंगाली समेत 5 भाषाओं को मिला शास्त्रीय भाषा का दर्जा

मराठी, बंगाली समेत 5 भाषाओं को मिला शास्त्रीय भाषा का दर्जा

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राष्ट्रोक्ति वेब डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पांच भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। मराठी, बंगाली, पाली, प्राकृत और असमिया भाषाओं को शास्त्रीय भाषा दिया गया l सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और एनडीए सरकार का यह एक ऐतिहासिक निर्णय है। उन्होंने कहा कि हमारी विरासत पर गर्व करने, हमारी संस्कृति को आगे बढ़ाने और सभी भारतीय भाषाओं एवं हमारी समृद्ध विरासत पर गर्व करने के दर्शन के साथ पूरी तरह मेल खाता है। उन्होंने कहा कि हमारी विरासत पर गर्व करने, हमारी संस्कृति को आगे बढ़ाने और सभी भारतीय भाषाओं एवं हमारी समृद्ध विरासत पर गर्व करने के दर्शन के साथ पूरी तरह मेल खाता है। बता दें कि शास्त्रीय भाषाएं के म...
किसी देश की भाषा केवल पारस्परिक संपर्क ही नहीं बल्कि संस्कृति को भी विकसित करती है

किसी देश की भाषा केवल पारस्परिक संपर्क ही नहीं बल्कि संस्कृति को भी विकसित करती है

विविध, शिक्षा- भाषा
आयुष मंत्रालय में मनाया जा रहा है हिंदी पखवाड़ा राष्ट्रोक्ति वेब डेस्क : हिंदी पखवाड़े के तहत आयुष मंत्रालय के कौटिल्य सभागार में राजभाषा समारोह का आयोजन किया गया। इस आयोजन में आयुष मंत्रालय के अंतर्गत विभिन्न कार्यालयों से प्रतिभाग करने के लिए अधिकारियों, कर्मचारियों को आमंत्रित किया गया था। इस समारोह में दो सत्रों में प्रतिभागियों को हिंदी भाषा राजभाषा और राजभाषा संसदीय निरीक्षण प्रश्नावली की तैयारी विषय पर सघन जानकारी पर प्रतिभागियों ने रुचिपूर्वक व्यवहारिक काम को समझा। समारोह के आरंभ में आयुष मंत्रालय में उपनिदेशक (राजभाषा) श्रीमती पूर्णिमा बोस ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। इस अवसर पर श्री सुबोध कुमार, निदेशक (भा.प्र.से.) ने राजभाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राज काज की भाषा ऐसी होने चाहिए जिसके माध्यम से हम सरकार के दृष्टिकोण अथ...
‘चार हफ्ते में बताएं क्या बदलाव हुए ?’, कोचिंग सेंटर हादसा मामले में दिल्ली-UP समेत तीन राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का आदेश

‘चार हफ्ते में बताएं क्या बदलाव हुए ?’, कोचिंग सेंटर हादसा मामले में दिल्ली-UP समेत तीन राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का आदेश

शिक्षा- भाषा
राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क : दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर कोचिंग सेंटर हादसा मामले में सुनवाई के दौरान शुक्रवार (20 सितंबर) को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोचिंग संस्थानों की व्यवस्था को लेकर एक कमेटी गठित की गई है, जो जल्द ही रिपोर्ट देगी। कोर्ट ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार से भी पूछा है कि उन्होंने इस मामले पर क्या कदम उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर चार हफ्ते के बाद सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त को इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र, दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम को नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में कोचिंग सेंटर डेथ चैंबर बन गए हैं। ये लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं। हम इन कोचिंग सेंटर को बंद कर सकते हैं और तब तक ऑनलाइन मोड के जरिये इनके संचालन की इजाजत देंगे जब तक ये फायर और दूसरे सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करते। 'प्रश...