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इतिहास के पन्‍नों से

बलिदान दिवस विशेष :  टिहरी जनक्रांति के नायक श्रीदेव सुमन

बलिदान दिवस विशेष : टिहरी जनक्रांति के नायक श्रीदेव सुमन

इतिहास के पन्‍नों से
राजमहल की पहाड़ी के ठीक समाने लगभग ढेड़ किलोमीटर दूर भिलंगना के जबर्दस्त शोर के ऊपर सुनसान निर्जन स्थान पर जिससे उन पर आठों पहर नजर रखी जा सके, एक मात्र जर्जर अंधेरी काल कोठरी में उनके कमजोर शरीर पर 36 सेर वजन की भारी बेड़ियाँ हाथ पाँव गले में डालकर कैद कर दिया गया। डॉ. हेमचन्‍द्र सकलानी जब तक गगन में सूरज चांद रहेगासुमन अमर तुम्हारा नाम रहेगा। विश्व में समय समय पर कुछ ऐसी विभूतियों ने जनम लिया जो अल्प आयु में अपने महान कार्यों से,समाज के लिए तथा अपनी जन्म भूमि के लिए दी गई अपनी शहादत से हमेशा के लिए अमर हो गये। जैसे बंगाल में जन्में यतीन्द्र नाथ दास जो मात्र पच्चीस वर्ष की अल्प आयु में शहीद हो गये थे और आयरलैंड में जनमें क्रांतिकारी मैक्सिविनी जिन्होंने 70 दिन का आमर...
जनजातीय गौरव के प्रति नई चेतना का हो रहा है संचार : राष्ट्रपति 

जनजातीय गौरव के प्रति नई चेतना का हो रहा है संचार : राष्ट्रपति 

इतिहास के पन्‍नों से, विविध
राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क भगवान बिरसा मुंडा एक प्रमुख आदिवासी नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक प्रमुख विद्रोह का नेतृत्व किया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर 'धरती आबा' की याद को सम्मानित करते हुए देशवासियों को बधाई दी। यह जनजातीय गौरव दिवस एक साल भर चलने वाले उत्सव का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा के योगदान और उनके कार्यों को याद करना है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश के सभी नागरिक इस महत्वपूर्ण दिन को मनाने के लिए एकजुट होने के लिए प्रोत्साहित किया है।  https://twitter.com/rashtrapatibhvn/status/1857068726610174104 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि 2021 से भारत सरकार ने प्रत्‍येक वर्ष 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मनाने की परंपरा...
5 October (501वीं जयंती) : गोंडवाना की शाही रानी ‘रानी दुर्गावती’

5 October (501वीं जयंती) : गोंडवाना की शाही रानी ‘रानी दुर्गावती’

इतिहास के पन्‍नों से, होम
राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क 24 जून, 1564 को अकबर की मुगल सेना के सेनापति आसफ खान के सैनिकों ने उनके हाथ और गर्दन पर लगातार तीरों से वार किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। गोंडवाना की सेना, जो अपनी शाही रानी को मुगल सेना के साथ सभी बाधाओं के बावजूद बहादुरी से लड़ते हुए देख रही थी, अचानक हार का एहसास कर रही थी और अपनी प्यारी माँ को लहूलुहान देखकर लड़ने का जोश बिखर गया।अंत देखकर, रानी दुर्गावती ने अपने विश्वस्त मंत्री (प्रधान) से उन्हें मार डालने के लिए कहा। रानी की यह मांग डरावनी थी और यह सुनकर उनके सैनिक चौंक गए। उन्हें पता था कि अगर मुगलों ने उन्हें जिंदा पकड़ लिया, तो उनका पूरा जीवन बर्बाद हो जाएगा और वे मुगल साम्राज्य की गुलाम बन जाएंगी। अपने सैनिकों की झिझक देखकर, जो स्पष्ट था, उन्होंने अपना कटार चाकू (खंजर) निकाला और खुद को उससे घायल कर लिया। 40 साल की होने से 3 महीने पहले, रानी...