Sunday, August 9राष्‍ट्रोक्ति
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विविध

जनजातीय महिलाओं में मेंस्ट्रुअल हेल्थ और स्वच्छता जागरूकता की मुहिम चला रहा है सुखी परिवार फाउंडेशन

विविध
राजधानी दिल्‍ली के लोधी एस्टेट स्थित चिन्‍मय मिशन के ऑडिटोरियम में 'सुखी परिवार फाउंडेशन' द्वारा आयोजित "अन्‍तर्राष्ट्रीय जनजातीय महिला सम्मेलन" संपन्न। सम्‍मेलन में जैन मुनि डॉ. गणी राजेन्द्र विजय जी महाराज के आह्वान पर जनजातीय महिलाओं के स्वास्थ्य जागरण का हुुुआ शंखनाद। प्रो. सूर्यप्रकाश सेमवाल 14 नवंबर, 2025 (नई दिल्‍ली) : सनातन भारत में नारी शक्ति का सम्मान और निरंतर अप्रतिम मेधा के बल पर प्रत्येक क्षेत्र में उनकी सहभागिता सुनिश्चित रही है। इसी विचार को धरातल पर उतारते हुए प्रसिद्ध जैन मुनि डॉक्टर गणी राजेन्द्र विजय जी महाराज ने जनजातीय महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके स्वास्थ्य व गरिमा को सुनिश्चित करने के लिए सुखी परिवार फाउंडेशन का गठन किया था। गुजरात राज्य के छोटा उदेपुर जिले के कंवाठ से शुरू हुआ यह अभियान नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित चिन्मय मिशन में वैदिक मंगलाचरण और नादस्वरम्...

हिन्दी दिवस पर राष्ट्रोक्ति, अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन व हिम उत्तरायणी द्वारा संगोष्ठी का आयोजन

विविध, शिक्षा- भाषा
 विशिष्ट हिन्दी सेवा और शिक्षक सम्मान से कई शिक्षाविद् सम्मानित राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क : दक्षिण दिल्ली के कैलाशपुरी, पालम स्थित सामुदायिक भवन में हिन्दी दिवस के अवसर पर राष्ट्रोक्ति वेब पोर्टल, अन्तर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन और हिम उत्तरायणी पत्रिका द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विषय प्रवर्तन करते हुए हिम उत्तरायणी पत्रिका की संपादक और दिल्ली विश्वविद्यालय में संस्कृत की प्राध्यापिका प्रो. सुषमा चौधरी ने कहा कि हिन्दी भारत की समृद्ध संस्कृति, समुन्नत परंपरा और निरंतर गतिमान समाज की सशक्त अभिव्यक्ति है। हिन्दी हमारे इतिहास और विजय गाथा का मुखर स्वर है, यह हिन्दी अब सात समंदर पार तक व्याप्त वैश्विक हिन्दी की भूमिका में है। समारोह के वरेण्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार और नागरी लिपि परिषद के महासचिव डॉ. हरि सिंह पाल ने कहा कि हमारी स्वतंत्रता, एकता और सांस्कृतिक पहचान को ...
मैं तो हिन्दी के बिना जी नहीं सकता -प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी

मैं तो हिन्दी के बिना जी नहीं सकता -प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी

विविध, शिक्षा- भाषा
इन दिनों हम सब अपनी -अपनी भाषा के दुखों में फंसे हुए हैं। यह सड़े हुए आदमी का दुख है। नकली दुख है। यह भाषा प्रेम नहीं, भाषायी ढ़ोंग है। यह भाषायी पिछड़ापन है। इसके कारण हम समग्रता में भाषा के सामने उपस्थित संकट को देख ही नहीं पा रहे।हमारे लिए आज महत्वपूर्ण यह नहीं है कि भाषा और समाज का अलगाव कैसे दूर करें,हमारे लिए जरूरी हो गया है कि सरकारी भाषा की सूची में अपनी भाषा को कैसे बिठाएं। सरकारी भाषा का पद जीवन की भाषा के पद से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है और यही वह बुनियादी घटिया समझ है जिसने हमें अंधभाषा प्रेमी बना दिया है। हिन्दीवाला बना दिया है। यह भावबोध सबसे घटिया भावबोध है। यह भावबोध भाषा विशेष के श्रेष्ठत्व पर टिका है। हम जब हिन्दी को या किसी भी भाषा को सरकारी भाषा बनाने की बात करते हैं तो भाषाय़ी असमानता की हिमायत कर रहे होते हैं। हमारे लिए सभी भाषाएं और बोलियां समान हैं और सबके हक समान ह...
राष्ट्रीय गोष्ठी में गूंजा हिमालय की सुरक्षा का मुद्दा, केंद्र सरकार से ठोस नीति की दरकार

राष्ट्रीय गोष्ठी में गूंजा हिमालय की सुरक्षा का मुद्दा, केंद्र सरकार से ठोस नीति की दरकार

पर्यावरण
नई दिल्‍ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्‍लब स्थित डिप्टी स्पीकर हॉल में पर्वतीय लोकविकास समिति, हिमालयन रिसोर्सेस एन्हांस सोसाइटी, नई पहल नई सोच और उत्तराखंड उत्थान प्रयोगशाला द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित हिमालयी आपदा पर केंद्रित राष्ट्रीय गोष्ठी का आयोजन किया गया। पर्वतीय लोकविकास समिति ने केंद्र सरकार से हिमालय की सुरक्षा और सतत विकास हेतु ठोस नीति बनाने का आग्रह किया है। हिमालय पर्वत के पहाड़ अभी शैशव अवस्था में हैं, यदि इन संवेदनशील चोटियों का विदोहन इसी तरह से होगा, नदियों और गदेरों के प्राकृतिक मार्गों में अतिक्रमण के साथ निर्माण कार्य नहीं रुकेंगे और नववलित पर्वतों पर जेसीबी चलाकर राजमार्ग बनाए जाएंगे तो फिर इस मानवजनित आपदा का प्रकृति को दोष देना ठीक नहीं है, ये आपदाएं नहीं रुकेंगी। ये विचार नई दिल्‍ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्‍लब स्थित डिप्टी स्पीकर हॉल में पर्वतीय लोकविकास समिति, हिमालयन...
सामाजिक समरसता, कुटुम्ब समन्वय और प्रकृति संरक्षण का भी अद्भुत संदेश देता है रक्षाबंधन

सामाजिक समरसता, कुटुम्ब समन्वय और प्रकृति संरक्षण का भी अद्भुत संदेश देता है रक्षाबंधन

विविध
रमेश शर्मा रिश्तों की मर्यादा और कुटुम्ब समन्वय सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
बलिदान दिवस विशेष :  टिहरी जनक्रांति के नायक श्रीदेव सुमन

बलिदान दिवस विशेष : टिहरी जनक्रांति के नायक श्रीदेव सुमन

इतिहास के पन्‍नों से
राजमहल की पहाड़ी के ठीक समाने लगभग ढेड़ किलोमीटर दूर भिलंगना के जबर्दस्त शोर के ऊपर सुनसान निर्जन स्थान पर जिससे उन पर आठों पहर नजर रखी जा सके, एक मात्र जर्जर अंधेरी काल कोठरी में उनके कमजोर शरीर पर 36 सेर वजन की भारी बेड़ियाँ हाथ पाँव गले में डालकर कैद कर दिया गया। डॉ. हेमचन्‍द्र सकलानी जब तक गगन में सूरज चांद रहेगासुमन अमर तुम्हारा नाम रहेगा। विश्व में समय समय पर कुछ ऐसी विभूतियों ने जनम लिया जो अल्प आयु में अपने महान कार्यों से,समाज के लिए तथा अपनी जन्म भूमि के लिए दी गई अपनी शहादत से हमेशा के लिए अमर हो गये। जैसे बंगाल में जन्में यतीन्द्र नाथ दास जो मात्र पच्चीस वर्ष की अल्प आयु में शहीद हो गये थे और आयरलैंड में जनमें क्रांतिकारी मैक्सिविनी जिन्होंने 70 दिन का आमर...
अपने काम और व्यवहार से उत्तराखण्डियों की विशेष पहचान- दुष्यंत गौतम

अपने काम और व्यवहार से उत्तराखण्डियों की विशेष पहचान- दुष्यंत गौतम

विविध
नई दिल्ली के गोल मार्केट स्थित जैन भवन में पर्वतीय लोकविकास समिति और अपनी धरोहर न्यास द्वारा किया गया राष्ट्रीय हरेला उत्सव का भव्‍य आयोजन नई दिल्ली: जन्मभूमि और मातृभूमि के साथ उत्तराखंड देवभूमि देश को प्रेरणा देने का कार्य करती है। चाहे उत्तरायणी हो या हरेला प्रकृति के सम्मान और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश दुनियाभर को उत्तराखंड से ही मिलता हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का देवभूमि के प्रति विशेष प्रेम भाव है और यहां की मातृशक्ति और समर्पित मेहनती लोगों के बल पर ही इस दशक को उत्तराखंड का दशक कहा जाता है। ये विचार नई दिल्ली के गोल मार्केट स्थित जैन भवन में पर्वतीय लोकविकास समिति और अपनी धरोहर न्यास द्वारा आयोजित राष्ट्रीय हरेला उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी श्री दुष्यंत गौतम ने व्यक्त किए। हरेला उत्सव क...
सामूहिक प्रयास से ही हमारी समृद्ध परंपराएं दुनिया तक पहुंचेंगी : डॉ. धन सिंह रावत

सामूहिक प्रयास से ही हमारी समृद्ध परंपराएं दुनिया तक पहुंचेंगी : डॉ. धन सिंह रावत

विविध
‘अपनी धरोहर न्यास’ और हिमालय जनकल्याण समिति द्वारा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित एक्टिविटी सेंटर में धरोहर संवाद -2025 का दो दिवसीय (22-23 जून) ऐतिहासिक आयोजन सम्‍पन्‍न। राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क अपनी धरोहर न्यास और हिमालय जनकल्याण समिति द्वारा उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में स्थित एक्टिविटी सेंटर में आयोजित धरोहर संवाद-2025 में ऐतिहासिक और दीर्घकालिक विमर्श के विषयों पर मंथन हुआ जो भविष्य के लिए सार्थक,उपयोगी और लाभप्रद सिद्ध होंगे। द्विदिवसीय धरोहर संवाद समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के उच्च शिक्षा,सहकारिता एवं कृषि मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने किया।विभिन्न सत्रों में संस्कृतिवेत्ता, इतिहासकार और गढ़वाल विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. दा...
चारधाम यात्रा: परंपरा, प्रकृति और आत्मिकता का संगम

चारधाम यात्रा: परंपरा, प्रकृति और आत्मिकता का संगम

धर्म-संस्‍कृति
राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क : "गंगोत्री यमुनोत्री च केदारं बदरी तथा। एते चारि स्थलान्याहु: स्वर्गस्य द्वारपथं ध्रुवम्॥ चार धाम यात्रा ? (Char Dham Yatra in Uttarakhand?) हिमालय की ऊँचाइयों में बसे उत्तराखंड के चार धाम — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ — भारत की धार्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं के अमूल्य रत्न हैं। इन तीर्थ स्थलों को केवल एक धार्मिक यात्रा के रूप में देखना इस अनुभव की गहराई को कम आंकना होगा। यह यात्रा है — देवत्व की खोज से आत्मा की ओर लौटने की। चारधाम का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व (Historical & Spiritual Importance) चारधाम यात्रा का उल्लेख हमें कई पुराणों में मिलता है। यह माना जाता है कि इन तीर्थों की यात्रा मानव को पापों से मुक्त कर मोक्ष की ओर अग्रसर करती है। ये स्थल केवल पूजा के केन्द्र नहीं, बल्कि भारतीय वास्तुकला, सं...