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विविध

श्री गंगोत्री धाम एवं श्री यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा-2025 शुरू

श्री गंगोत्री धाम एवं श्री यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा-2025 शुरू

धर्म-संस्‍कृति
राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क : अक्षय तृतीया के दिन श्री गंगोत्री धाम एवं श्री यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की विश्‍व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा-2025 का शुभारंभ हो गया है। कपाट खुलने के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पवित्र गंगोत्री धाम में पूजा-अर्चना की। बाद में उन्होंने श्री यमुनोत्री धाम में यमुनोत्री मंदिर में आरती भी की। पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया से कहा कि आज से चार धाम यात्रा का शुभारंभ हो गया है। गंगोत्री, यमुनोत्री के कपाट आज खुल गए हैं। यह यात्रा एक उत्सव की तरह है। सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। हम चाहते हैं कि यात्रा सुरक्षित, सुगम और बिना किसी परेशानी के हो। “मैं चारधाम यात्रा पर आने वाले सभी तीर्थयात्रियों का स्वागत है। हमारा प्रयास है कि तीर्थयात्रियों को कोई परेशानी न हो, उनकी यात्रा सुगम हो, सुरक्षित हो। हम लगातार निगरानी कर रहे हैं। यह ...
प्रयागराज महाकुम्भ : संस्कार भारती ने ‘राष्ट्र रत्ना’ शोभायात्रा के माध्यम से वीरांगनाओं का किया स्मरण

प्रयागराज महाकुम्भ : संस्कार भारती ने ‘राष्ट्र रत्ना’ शोभायात्रा के माध्यम से वीरांगनाओं का किया स्मरण

धर्म-संस्‍कृति
प्रयागराज। हम भारतवासी अपने स्वाधीनता की शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर हैं। देश के नव निर्माण में योगदान देने वाली आदर्श मातृ शक्ति और वीरांगनाओं की अनगिनत गाथाएं अनुकरणीय हैं। उन वीरांगनाओं के उत्सर्ग और समर्पण को स्मरण करने हेतु संस्कार भारती की ओर से प्रयागराज महाकुम्भ 2025 के दौरान ‘राष्ट्र रत्ना’ शोभायात्रा का आयोजन किया गया।22 जनवरी, 2025 को यह शोभा यात्रा सेक्टर 10 स्थित संस्कार भारती शिविर-महेश्वर से गंगा जी के तट तक संपन्न हुई। शोभायात्रा में भारत के राष्ट्रीय, समाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक व आध्यात्मिक क्षेत्रों में अपने शौर्य का, मेधा का और जीवट का प्रदर्शन करने वाली नारी शक्ति को पुनर्जागरण का संदेश देने वाली योगदात्रियां, जैसे-रानी दुर्गावती, लोकमाता अहिल्याबाई होलकर, सावित्री बाई फुले, रानी चेनम्मा आदि को स्मरण महत्वपूर्ण है। हमारा देश मीराबाई की 525वीं जयंती मना रहा है। चं...
समता, समरसता का संदेश देने के साथ ही भेदभाव को दूर करने का संकल्प लें – डॉ. कृष्णगोपाल जी

समता, समरसता का संदेश देने के साथ ही भेदभाव को दूर करने का संकल्प लें – डॉ. कृष्णगोपाल जी

विविध
संत, संघ व समाज मिलकर दुनिया का नेतृत्व करने वाला भारत बनाएंगे महाकुम्भ नगर, 21 जनवरी।महाकुम्भ मेला क्षेत्र के सेक्टर 17 में अखिल भारतीय संत समागम का आयोजन किया गया। संत समागम में देशभर के विभिन्न मत-पंथ व सम्प्रदायों के संतों ने दो दिनों तक सामाजिक समरसता विषय पर मंथन किया। मंच पर संत, संघ, सरकार के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में न हिन्दू पतितो भवेत का उद्घोष किया गया। मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी, अखिल भारतीय सम्पर्क प्रमुख रामलाल जी, प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के अलावा प्रमुख संत मंचासीन रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी ने संत समागम में कहा कि महाकुम्भ सारे विश्व को अध्यात्म का संदेश देगा। विश्व के लिए यह आदर्श कुम्भ है। इस समय पूरा हिन्दुस्तान महाकुम्भ क्षेत्र में स्थित है। प्रयाग की पावन धरती सम्पूर्...
जनजातीय गौरव के प्रति नई चेतना का हो रहा है संचार : राष्ट्रपति 

जनजातीय गौरव के प्रति नई चेतना का हो रहा है संचार : राष्ट्रपति 

इतिहास के पन्‍नों से, विविध
राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क भगवान बिरसा मुंडा एक प्रमुख आदिवासी नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक प्रमुख विद्रोह का नेतृत्व किया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर 'धरती आबा' की याद को सम्मानित करते हुए देशवासियों को बधाई दी। यह जनजातीय गौरव दिवस एक साल भर चलने वाले उत्सव का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा के योगदान और उनके कार्यों को याद करना है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश के सभी नागरिक इस महत्वपूर्ण दिन को मनाने के लिए एकजुट होने के लिए प्रोत्साहित किया है।  https://twitter.com/rashtrapatibhvn/status/1857068726610174104 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि 2021 से भारत सरकार ने प्रत्‍येक वर्ष 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मनाने की परंपरा...
छठ महापर्व का पौराणिक आधार और मान्यता !

छठ महापर्व का पौराणिक आधार और मान्यता !

धर्म-संस्‍कृति, होम
अमित दुबे जब हमने लोक आस्था के पर्व छठ पर लोगों के विचार एकत्रित करना शुरू किया, तो एक रोचक प्रश्न से सामना हुआ। प्रश्न यह कि छठ पूजा बिहार में ही क्यों? इस प्रश्न ने पर्व के उद्गम व इसकी विकास यात्रा के बारे में जानने की प्रेरणा दी। इससे सम्बंधित कई प्राचीन कथाएं भी हैं। लेकिन, सबसे अधिक प्रामाणिक लगा सूर्य विज्ञान की भारतीय परम्परा से जुड़ाव। दरअसल, सूर्य विज्ञान का प्राचीन केंद्र बिहार ही था। अपनी क्षमता के अनुसार प्रश्न का उत्तर ढूंढने के क्रम में बिहार राष्ट्रभाषा परिषद द्वारा प्रकाशित हस्तलिखित पोथियों के विस्तृत विवरणी ने हमारी सहायता की. उस विवरणी ने जो सूत्र दिया उसके आधार पर हमने जो पाया वह इस प्रकार है- सूर्य विज्ञान के पर्व छठ का दस्तावेजी संदर्भराष्ट्रभाषा परिषद के अधिकारी के तौर पर शिवपूजन सहाय ने पं. रामनारायण शास्त्री को बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध हस्तलिखित ...
सदा के लिए मौन हो गई लोक गायिका शारदा सिन्हा की मधुर आवाज …

सदा के लिए मौन हो गई लोक गायिका शारदा सिन्हा की मधुर आवाज …

कला / संगीत, होम
राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क छठ गीतों के साथ मधुर प्रस्तुति देने वाली प्रसिद्ध मैथली भोजपुरी गायिका शारदा सिन्हा के मधुर स्‍वर अब सदा के लिए शांत हो गए। 72 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनका निधन मैथली और भोजपुरी संगीत क्षेत्र में अपूर्णीय क्षति है। जानिए कौन थी शारदा सिन्हा! भारतीय लोक संगीत मैथिली और भोजपुरी को बुलंदियों तक पहुचाने वाली प्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा का जन्म 1 अक्टूबर 1952 में बिहार के सुपौल जनपद के हुलास ग़ांव में हुआ था। शारदा सिन्हा ने मिथिला विश्वविद्यालय से संगीत की पढ़ाई की और इसके पश्‍चात् मगध महिला कॉलेज, प्रयाग से उन्होंने संगीत का प्रशिक्षण लिया। मैथली गायिकी से शुरुआत करने के बाद जल्द ही उनकी आवाज का जादू भोजपुरी, मगही और हिंदी भाषी क्षेत्रों तक फैल गया। छठ के गीतों से मिली प्रसिद्धि शारदा सिन्हा की छठ पूजा उत्सव के दौ...
Current Affairs 2024: 23 अक्‍टूबर अपडेट्स

Current Affairs 2024: 23 अक्‍टूबर अपडेट्स

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राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क : 24 अक्टूबर 2024 को ओडिशा और पश्चिम बंगाल से टकराएगा चक्रवात ‘दाना’ भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चक्रवात ‘दाना’ के कारण बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव वाले क्षेत्र को लेकर चेतावनी जारी की है। IMD के अनुसार 23 अक्टूबर तक इसके एक गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की पूरी संभावना है। यह तूफान 24 अक्टूबर को ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों पर दस्तक दे सकता है । संभावना यह भी है कि चक्रवात ‘दाना’ इन राज्यों में कम से कम तीन-चार दिनों तक भारी बारिश लेकर आएगा। वहीं तटीय क्षेत्रों के मछुआरों को इस सप्ताह समुद्र में न जाने की चेतावनी दी गई है क्योंकि तूफान की स्थिति गंभीर हो सकती है। चक्रवात की गंभीर स्थिति को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से ओडिशा राज्य सरकार ने 23 से 25 अक्टूबर तक राज्‍य के 14 जिलों में स्कूल और कॉलेज को बंद करने का शासनादेश जारी कर दिया है, जिसके अन्‍तर्...
राष्ट्रोदय के अप्रतिम महायोद्धा राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख

राष्ट्रोदय के अप्रतिम महायोद्धा राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख

विविध, होम
-सूर्य प्रकाश सेमवाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के व्रती स्वयंसेवक, सुविख्यात समाजसेवी और राष्ट्रऋषि की संज्ञा से सम्मानित नानाजी देशमुख  (मूलनाम-चंडिकादास अमृतराव देशमुख) का जन्म महाराष्ट्र के एक मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हिंगोली जिले के कडोली कस्बे में शरद पूर्णिमा के दिन 11 अक्टूबर सन 1916 को हुआ था I महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण से विशेष प्रभावित नानाजी को संघ शाखा से आद्य सरसंघचालक डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार ने जोड़ा तो उनकी प्रतिभा,कार्यक्षमता और सांगठनिक कौशल को देखकर संघ कार्य विस्तार की जिम्मेदारी दी द्वितीय सरसंघचालक पूज्य श्रीगुरूजी ने I आठवीं कक्षा में ही नानाजी बाल स्वयंसेवक के रूप में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़ गए थे I उनका बचपन घोर अभावों में बीता। यहां तक कि उनकी स्कूली शिक्षा भी ठीक से पूरी नहीं हो पाती थी। उन्होंने जीवन के प्रारंभ...
5 October (501वीं जयंती) : गोंडवाना की शाही रानी ‘रानी दुर्गावती’

5 October (501वीं जयंती) : गोंडवाना की शाही रानी ‘रानी दुर्गावती’

इतिहास के पन्‍नों से, होम
राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क 24 जून, 1564 को अकबर की मुगल सेना के सेनापति आसफ खान के सैनिकों ने उनके हाथ और गर्दन पर लगातार तीरों से वार किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। गोंडवाना की सेना, जो अपनी शाही रानी को मुगल सेना के साथ सभी बाधाओं के बावजूद बहादुरी से लड़ते हुए देख रही थी, अचानक हार का एहसास कर रही थी और अपनी प्यारी माँ को लहूलुहान देखकर लड़ने का जोश बिखर गया।अंत देखकर, रानी दुर्गावती ने अपने विश्वस्त मंत्री (प्रधान) से उन्हें मार डालने के लिए कहा। रानी की यह मांग डरावनी थी और यह सुनकर उनके सैनिक चौंक गए। उन्हें पता था कि अगर मुगलों ने उन्हें जिंदा पकड़ लिया, तो उनका पूरा जीवन बर्बाद हो जाएगा और वे मुगल साम्राज्य की गुलाम बन जाएंगी। अपने सैनिकों की झिझक देखकर, जो स्पष्ट था, उन्होंने अपना कटार चाकू (खंजर) निकाला और खुद को उससे घायल कर लिया। 40 साल की होने से 3 महीने पहले, रानी...
नित्य शाखा से ही समाज के लिए योग्य व्यक्ति निर्मित होंगे– डॉ. मोहन भागवत

नित्य शाखा से ही समाज के लिए योग्य व्यक्ति निर्मित होंगे– डॉ. मोहन भागवत

विविध, होम
राष्ट्रोक्ति वेब डेस्क सरसंघचालक जी ने प्यारेराम प्राचीन मंदिर के किए दर्शन, स्वयंसेवकों के साथ आंवला, बिल्वपत्र, पीपल आदि के 51 पौधों का किया रोपण बारां : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी अपने चार दिवसीय बारां प्रवास के दूसरे दिन प्रातः बारां शहर के मांगरोल रोड स्थित प्राचीन प्यारेराम जी मंदिर के देवदर्शन के लिए पहुंथा। वहां मंदिर दर्शन के पश्चात इस ऐतिहासिक मंदिर के इतिहास के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। प्यारेराम जी मंदिर का इतिहास तीन शताब्दी पुराना है, जहां महंत श्री प्यारेराम जी ने अनंत भगवान की प्रतिमा स्थापित कर तीन परकोटे वाले विशाल मंदिर का निर्माण करवाया था। देवदर्शन के पश्चात् परिसर में नित्य लगने वाली शिव मंदिर तरुण व्यवसायी शाखा में स्वयंसेवकों के साथ एक घंटे के निश्चित कार्यक्रमों में भाग लिया। जिज्ञासा समाधान में श...