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नौगाम पुलिस स्टेशन विस्फोट मामले में एलजी ने जांच के आदेश दिए

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राष्‍ट्रोक्ति समाचार : श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। घटना में कई लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताये जा रहे हैं। राहत और बचाव कार्य तेज़ी से जारी है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने धमाके पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि नौगाम पुलिस स्टेशन में हुए इस आकस्मिक विस्फोट से जान-माल की हुई क्षति से वह अत्यंत व्यथित हैं। उपराज्यपाल ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। एल-जी सिन्हा ने कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने इस हादसे के कारणों की जांच के लिए अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं।...

जनजातीय महिलाओं में मेंस्ट्रुअल हेल्थ और स्वच्छता जागरूकता की मुहिम चला रहा है सुखी परिवार फाउंडेशन

विविध
राजधानी दिल्‍ली के लोधी एस्टेट स्थित चिन्‍मय मिशन के ऑडिटोरियम में 'सुखी परिवार फाउंडेशन' द्वारा आयोजित "अन्‍तर्राष्ट्रीय जनजातीय महिला सम्मेलन" संपन्न। सम्‍मेलन में जैन मुनि डॉ. गणी राजेन्द्र विजय जी महाराज के आह्वान पर जनजातीय महिलाओं के स्वास्थ्य जागरण का हुुुआ शंखनाद। प्रो. सूर्यप्रकाश सेमवाल 14 नवंबर, 2025 (नई दिल्‍ली) : सनातन भारत में नारी शक्ति का सम्मान और निरंतर अप्रतिम मेधा के बल पर प्रत्येक क्षेत्र में उनकी सहभागिता सुनिश्चित रही है। इसी विचार को धरातल पर उतारते हुए प्रसिद्ध जैन मुनि डॉक्टर गणी राजेन्द्र विजय जी महाराज ने जनजातीय महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके स्वास्थ्य व गरिमा को सुनिश्चित करने के लिए सुखी परिवार फाउंडेशन का गठन किया था। गुजरात राज्य के छोटा उदेपुर जिले के कंवाठ से शुरू हुआ यह अभियान नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित चिन्मय मिशन में वैदिक मंगलाचरण और नादस्वरम्...

हिन्दी दिवस पर राष्ट्रोक्ति, अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन व हिम उत्तरायणी द्वारा संगोष्ठी का आयोजन

विविध, शिक्षा- भाषा
 विशिष्ट हिन्दी सेवा और शिक्षक सम्मान से कई शिक्षाविद् सम्मानित राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क : दक्षिण दिल्ली के कैलाशपुरी, पालम स्थित सामुदायिक भवन में हिन्दी दिवस के अवसर पर राष्ट्रोक्ति वेब पोर्टल, अन्तर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन और हिम उत्तरायणी पत्रिका द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विषय प्रवर्तन करते हुए हिम उत्तरायणी पत्रिका की संपादक और दिल्ली विश्वविद्यालय में संस्कृत की प्राध्यापिका प्रो. सुषमा चौधरी ने कहा कि हिन्दी भारत की समृद्ध संस्कृति, समुन्नत परंपरा और निरंतर गतिमान समाज की सशक्त अभिव्यक्ति है। हिन्दी हमारे इतिहास और विजय गाथा का मुखर स्वर है, यह हिन्दी अब सात समंदर पार तक व्याप्त वैश्विक हिन्दी की भूमिका में है। समारोह के वरेण्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार और नागरी लिपि परिषद के महासचिव डॉ. हरि सिंह पाल ने कहा कि हमारी स्वतंत्रता, एकता और सांस्कृतिक पहचान को ...
मैं तो हिन्दी के बिना जी नहीं सकता -प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी

मैं तो हिन्दी के बिना जी नहीं सकता -प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी

विविध, शिक्षा- भाषा
इन दिनों हम सब अपनी -अपनी भाषा के दुखों में फंसे हुए हैं। यह सड़े हुए आदमी का दुख है। नकली दुख है। यह भाषा प्रेम नहीं, भाषायी ढ़ोंग है। यह भाषायी पिछड़ापन है। इसके कारण हम समग्रता में भाषा के सामने उपस्थित संकट को देख ही नहीं पा रहे।हमारे लिए आज महत्वपूर्ण यह नहीं है कि भाषा और समाज का अलगाव कैसे दूर करें,हमारे लिए जरूरी हो गया है कि सरकारी भाषा की सूची में अपनी भाषा को कैसे बिठाएं। सरकारी भाषा का पद जीवन की भाषा के पद से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है और यही वह बुनियादी घटिया समझ है जिसने हमें अंधभाषा प्रेमी बना दिया है। हिन्दीवाला बना दिया है। यह भावबोध सबसे घटिया भावबोध है। यह भावबोध भाषा विशेष के श्रेष्ठत्व पर टिका है। हम जब हिन्दी को या किसी भी भाषा को सरकारी भाषा बनाने की बात करते हैं तो भाषाय़ी असमानता की हिमायत कर रहे होते हैं। हमारे लिए सभी भाषाएं और बोलियां समान हैं और सबके हक समान ह...
नई शिक्षा नीति में संस्कार, संस्कृति और तकनीक संतुलन पर जोर : डॉ. मोहन भागवत

नई शिक्षा नीति में संस्कार, संस्कृति और तकनीक संतुलन पर जोर : डॉ. मोहन भागवत

देश-दुनिया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा विज्ञान भवन, दिल्‍ली में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला “100 वर्ष की संघ यात्रा : नए क्षितिज” के तृतीय एवं अंतिम दिवस पर  “जिज्ञासा समाधान” कार्यक्रम संपन्न नई दिल्‍ली, 27 अगस्त। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विज्ञान भवन, दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला “100 वर्ष की संघ यात्रा : नए क्षितिज” का मंगलवार को समापन हुआ। अंतिम दिन “जिज्ञासा समाधान” कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए शिक्षा, संस्कृति, तकनीक, परंपरा और भारतीय ज्ञान परंपरा पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन दिल्ली प्रांत कार्यवाह अनिल गुप्ता ने किया। उन्होंने बताया कि इस संवाद के लिए संघ को कुल 218 जिज्ञासाएँ प्राप्त हुईं, जिन्हें विषयवार 21 समूहों में विभाजित किया गया है। इसके अतिरिक्त लगभग 148 सुझाव...
अंतरराष्ट्रीय व्यापार केवल स्वेच्छा से हो, दबाव में नहीं – डॉ. मोहन भागवत

अंतरराष्ट्रीय व्यापार केवल स्वेच्छा से हो, दबाव में नहीं – डॉ. मोहन भागवत

देश-दुनिया
तीन दिवसीय व्याख्यानमाला (द्वितीय दिवस) : ‘100 वर्ष की संघ यात्रा – नए क्षितिज’  नई दिल्ली, 27 अगस्त। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि समाज और जीवन में संतुलन ही धर्म है, जो किसी भी अतिवाद से बचाता है। भारत की परंपरा इसे मध्यम मार्ग कहती है और यही आज की दुनिया की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के समक्ष उदाहरण बनने के लिए समाज परिवर्तन की शुरुआत घर से करनी होगी। इसके लिए संघ ने पंच परिवर्तन बताए हैं – कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व-बोध (स्वदेशी) और नागरिक कर्तव्यों का पालन। आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी को प्राथमिकता दें तथा भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार केवल स्वेच्छा से होना चाहिए, किसी दबाव में नहीं। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला ‘100 वर्...
100 वर्ष की संघ यात्रा (प्रथम दिवस): भारत के विश्वगुरु बनने में ही संघ की सार्थकता – डॉ. मोहन भागवत

100 वर्ष की संघ यात्रा (प्रथम दिवस): भारत के विश्वगुरु बनने में ही संघ की सार्थकता – डॉ. मोहन भागवत

देश-दुनिया
दिल्‍ली के विज्ञान भवन में ‘100 वर्ष की संघ यात्रा – नए क्षितिज’ विषय पर (26-27-28) तीन दिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया है। नई दिल्‍ली, 26 अगस्त। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के प्रथम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ का निर्माण भारत को केंद्र में रखकर हुआ है और इसकी सार्थकता भारत के विश्वगुरु बनने में है। संघ कार्य की प्रेरणा संघ प्रार्थना के अंत में कहे जाने वाले “भारत माता की जय” से मिलती है। संघ के उत्थान की प्रक्रिया धीमी और लंबी रही है, जो आज भी निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि संघ भले हिन्दू शब्द का उपयोग करता है, लेकिन उसका मर्म ‘वसुधैव कुटुंबकम’ है। इसी क्रमिक विकास के तहत गांव, समाज और राष्ट्र को संघ अपना मानता है। संघ कार्य पूरी तरह स्वयंसेवकों द्वारा संचालित होता है। कार्यकर्ता स्वयं नए कार्यक...
राष्ट्रीय गोष्ठी में गूंजा हिमालय की सुरक्षा का मुद्दा, केंद्र सरकार से ठोस नीति की दरकार

राष्ट्रीय गोष्ठी में गूंजा हिमालय की सुरक्षा का मुद्दा, केंद्र सरकार से ठोस नीति की दरकार

पर्यावरण
नई दिल्‍ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्‍लब स्थित डिप्टी स्पीकर हॉल में पर्वतीय लोकविकास समिति, हिमालयन रिसोर्सेस एन्हांस सोसाइटी, नई पहल नई सोच और उत्तराखंड उत्थान प्रयोगशाला द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित हिमालयी आपदा पर केंद्रित राष्ट्रीय गोष्ठी का आयोजन किया गया। पर्वतीय लोकविकास समिति ने केंद्र सरकार से हिमालय की सुरक्षा और सतत विकास हेतु ठोस नीति बनाने का आग्रह किया है। हिमालय पर्वत के पहाड़ अभी शैशव अवस्था में हैं, यदि इन संवेदनशील चोटियों का विदोहन इसी तरह से होगा, नदियों और गदेरों के प्राकृतिक मार्गों में अतिक्रमण के साथ निर्माण कार्य नहीं रुकेंगे और नववलित पर्वतों पर जेसीबी चलाकर राजमार्ग बनाए जाएंगे तो फिर इस मानवजनित आपदा का प्रकृति को दोष देना ठीक नहीं है, ये आपदाएं नहीं रुकेंगी। ये विचार नई दिल्‍ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्‍लब स्थित डिप्टी स्पीकर हॉल में पर्वतीय लोकविकास समिति, हिमालयन...
पहले साहित्य में, फिर धरातल पर हुआ था देश का विभाजन  – मनोज कुमार

पहले साहित्य में, फिर धरातल पर हुआ था देश का विभाजन – मनोज कुमार

शिक्षा- भाषा
वंदेमातरम गीत के विभाजन को स्वीकार कर भारत विभाजन की नींव रख दी गई थी, देश का विभाजन बाद में हुआ, उससे पहले विचारों में विभाजन हो गया था। परंतु विभाजन के जितने जिम्मेदार गांधी थे, उतने ही जिम्मेदार अंग्रेज, तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व एवं उस समय का समाज भी था। भारत विभाजन की पृष्ठभूमि में अंग्रेजों द्वारा स्थापित तीन संस्थाएं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, मुस्लिम लीग एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी थी। यह विचार अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सह-संगठन मंत्री मनोज कुमार ने व्यक्त किए। वे साहित्य परिषद, जयपुर इकाई द्वारा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज के सभागार में आयोजित परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे। पिछले पाँच-छह दशकों में भारत विभाजन के विषय पर पर्याप्त साहित्य सभी विधाओं में सृजित हुआ है। प्रमुख रूप से इसके तीन प्रकार हैं, एक विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित; दूसरा विभाजन के द...
सामाजिक समरसता, कुटुम्ब समन्वय और प्रकृति संरक्षण का भी अद्भुत संदेश देता है रक्षाबंधन

सामाजिक समरसता, कुटुम्ब समन्वय और प्रकृति संरक्षण का भी अद्भुत संदेश देता है रक्षाबंधन

विविध
रमेश शर्मा रिश्तों की मर्यादा और कुटुम्ब समन्वय सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश