
राष्ट्रोक्ति वेब डेस्क : हाल के वर्षों में, कई इस्लामिक देशों में बच्चों के यौन शोषण के मामले सामने आए हैं। मलेशिया में, हाल ही में 400 से अधिक बच्चों को एक इस्लामिक संगठन द्वारा चलाए जा रहे चैरिटी होम से बचाया गया, जहां उन पर यौन शोषण हो रहा था। वहीं पिछले वर्ष पाकिस्तान में भी एक एनजीओ ने यौन शोषण के 2,227 मामलों की एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी ।
इस्लामिक देश मलेशिया में इस्लामिक चैरिटी होम्स में बच्चों के यौन शोषण किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को मलेशिया के इस्लामिक चैरिटी होम्स में बच्चों के यौन शोषण की शिकायत मिली थी ।
- मलेशियाई पुलिस ने 2 राज्यों में संचालित 20 इस्लामिक चैरिटी होम्स में छापेमारी की, जिसमें 201 लड़कियों समेत 402 बच्चों का रेस्क्यू किया गया ।
- ये सभी चैरिटी होम्स एक बड़े इस्लामिक बिजनेस समूह (जीआईएसबी) द्वारा संचालित किए जा रहे थे, यह समूह एक प्रतिबंधित इस्लामी मजहब से जुड़ा हुआ है ।
- रेस्क्यू किए गए बच्चे जीआईएसबी कर्मचारियों के बच्चे थे। उन्हें जन्म के तुरंत बाद ही इन बालगृहों में भेज दिया गया था।
- इन चैरिटी होम्स में उन्हें कई प्रकार के दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ा।
- पीड़ितों के साथ चैरिटी होम्स में आरोपियों द्वारा दुष्कर्म किया गया तथा बाद में उन्हें अन्य बच्चों के साथ दुष्कर्म करना सिखाया गया।
- जिन बच्चों ने विरोध किया, उनके हाथों पर गर्म चम्मच रख दिए गए, अन्य भी कई तरह से प्रताड़ित किया गया।
पुलिस की कार्रवाई
मलेशिया में टॉप पुलिस अधिकारी रजारूद्दीन हुसैन ने बताया कि पुलिस ने छापेमारी के दौरान 20 इस्लामिक चैरिटी होम्स में बच्चों के यौन शोषण का भंडाफोड़ करते हुए समेत 400 से अधिक बच्चों का रेस्क्यू किया गया, अहम बात यह है कि रेस्क्यू किए गए बच्चों की उम्र 1 से 17 साल के बीच है। वहीं इस कांड में संलिप्त 171 संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनमें कई शिक्षक और देखभाल करने वाले शामिल हैं। गिरफ्तार किये गये लोगों में 66 पुरुष और 105 महिलाएं शामिल हैं, जिनकी उम्र 17 से 64 वर्ष के बीच है। इस पूरे मामले का पता एक FIR से लगना शुरू हुआ था। उस रिपोर्ट में दुर्व्यवहार, यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया था। हालांकि उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कराने वाले शख्स के नाम का खुलासा करने से इनकार कर दिया।
GISB की भूमिका :

ये सभी चैरिटी होम्स ग्लोबल इखवान सर्विसेज एंड बिजनेस (GISB) द्वारा संचालित थे। GISB एक मलेशियाई फर्म है, जो सुपरमार्केट कारोबार में शामिल है। इसकी वेबसाइट के अनुसार यह इंडोनेशिया, सिंगापुर, मिस्र, सऊदी अरब, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और थाईलैंड सहित कई देशों में काम करती है।
अल-अरकम इस्लामिक मजहब से जुड़ी है GISB :
इस्लामिक चैरिटी होम्स संचालित करने वाली कंपनी (GISB) मलेशिया स्थित अल-अरकम मजहब से जुड़ी है। अल-अरकम एक मलेशियाई -आधारित इस्लामी संप्रदाय है, जिसकी स्थापना अशारी मोहम्मद ने की थी। इस संप्रदाय को 21 अक्टूबर 1994 को मलेशियाई सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था। लेकिन अब यह खुद को मुस्लिम प्रथाओं पर आधारित एक इस्लामी समूह बताता है। अल-अरकम संप्रदाय पर प्रतिबंध लगने के बाद, ग्लोबल इखवान समूह ने कई गतिविधियां कीं, जिनमें इखवान पॉलीगैमी क्लब और ओबेडिएंट वाइव्स क्लब शामिल हैं, अशारी मोहम्मद की पत्नी खदीजा आम ने दो किताबें लिखी थीं, जिन पर धार्मिक आधार पर प्रतिबंध लगा दिया गया था । अशारी मोहम्मद की मौत के बाद से, इस ग्रुप का कई बार नाम बदला गया है। फर्म पहले भी विवादों में रह चुकी है। इससे पहले मुसलमानों में बहुविवाह के लिए प्रोत्साहित करने पर काफी विवाद हो चुका है। इसके साथ ही फर्म ने महिलाओं से ‘वेश्याओं की तरह’ अपने पतियों के साथ रहने का आह्वान किया था।

अशारी मोहम्मद, फाउंडर अल-अरकम )
पाकिस्तान में हर दिन औसतन 12 बच्चों का यौन शोषण
पिछले वर्ष अगस्त 2023 में पाकिस्तान में बच्चों के यौन शोषण के मामलों पर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई थी, एक गैर-लाभकारी संगठन साहिल द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, 2023 के पहले छह महीनों में पाकिस्तान में हर दिन औसतन 12 बच्चे यौन शोषण का शिकार हुए। इस रिपोर्ट में कुल 2,227 मामलों की जानकारी दी गई है। इनमें से अधिकतर मामलों में शोषण का स्थान पता नहीं चला, लेकिन जो स्थान पता चले उनमें से 31 प्रतिशत मामले सड़कों पर हुए। यही नहीं, पाकिस्तान में बाल यौन शोषण के मामले तीसरे स्थान पर हैं।
इस्लामिक देशों में बच्चों के यौन शोषण के मामलों की भयानक सच्चाई से केवल इस्लाम के नाम पर चलने वाले चैरिटी होम्स ही नहीं बल्कि पूरी समाज को चिंतित होना चाहिए। वास्तव में इस्लामिक देशों में यौन शोषण की स्थितियों को संबोधित करने के लिए सांस्कृतिक व कानूनी ढांचों की कमी एक प्रमुख बाधा है। धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से कई बार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया जाता। इन मामलों में अधिक साक्षरता, खुला संवाद, और शैक्षिक कार्यक्रमों की आवश्यकता है ताकि बच्चों के यौन शोषण के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई जा सके और पीड़ितों की मदद की जा सके।
