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Waqf Board में संशोधन जरूरी : डाॅ. चन्द्र प्रकाश सिंह

राष्ट्रोक्ति वेब डेस्क : सन् 1954 में नेहरू द्वारा विभाजित भारत में पुनः एक नया पाकिस्तान खड़ा करने के लिए वक्फ़ एक्ट लाया गया। मस्जिद और मकबरों के लिए ही नहीं मूल रूप से जो मुसलमान भारत छोड़ कर पाकिस्तान चले गये थे उनकी सम्पत्तियों की रक्षा के लिए यह कानून लाया गया था, जिसका शनैः-शनैः विस्तार कर इसे भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने का माध्यम बना दिया गया।

सन् 1954 के वक्फ़ एक्ट के आधार पर 1964 में वक्फ बोर्ड का गठन किया गया। जिसे मुस्लिमों द्वारा किए गए दान और मस्जिदों तथा मकबरों के संरक्षण एवं प्रबंधन के नाम पर बनाया गया था और धीरे-धीरे उसकी शक्तियों का विस्तार कर उसे भारत पर कब्जा करने का हथियार बना दिया गया।

1995 में उसे सर्वे द्वारा या मुस्लिम कार्य में लगातार हो रहे प्रयोग के आधार पर किसी की भी सम्पत्ति को वक्फ़ घोषित करने का अधिकार प्राप्त हो गया और 2013 में उसे एक न्यायिक प्राधिकरण बनाकर उसके द्वारा कब्जा बोली गई सम्पत्तियों पर स्वयं उसे ही सुनवाई का अधिकार दे दिया गया। वक्फ़ के अनुसार जो सम्पत्ति एक बार वक्फ़ घोषित कर दी गई वह अनन्त काल तक वक्फ़ ही रहेगी।

रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, पार्क, गली, चौराहों और सड़कों पर कुकुरमुत्तों की तरह उगने वाले मजार और मकबरे पूरे भारत को वक्फ़ घोषित करने की योजना के अंग हैं। भीषण जंगल चाहे वह राजा जी नेशनल पार्क का आन्तरिक भाग हो या दुधवा नेशनल पार्क हो या बस्तर के जंगल हों या देश का कोई अन्य दुर्गम क्षेत्र हो, जहाँ कभी कोई मानव न रहा हो वहाँ भी इनकी माजारें इसीलिए बढ़ती जा रही हैं क्योंकि एक दिन पूरे भारत को वक्फ़ घोषित करवाना है। इसके लिए वे पूरी योजना के साथ कार्य कर रहे हैं। यदि वक्फ़ के विरुद्ध आवाज नहीं उठायी गयी तो यह वक्फ़ पूरे भारत को निगलने के लिए तैयार है।

डॉ.चंद्र प्रकाश

लेखक वरिष्ठ साहित्यकार एवं अरुधन्ती वशिष्ठ संस्थान में निदेशक हैं।