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100 वर्ष की संघ यात्रा (प्रथम दिवस): भारत के विश्वगुरु बनने में ही संघ की सार्थकता – डॉ. मोहन भागवत

100 वर्ष की संघ यात्रा (प्रथम दिवस): भारत के विश्वगुरु बनने में ही संघ की सार्थकता – डॉ. मोहन भागवत

देश-दुनिया
दिल्‍ली के विज्ञान भवन में ‘100 वर्ष की संघ यात्रा – नए क्षितिज’ विषय पर (26-27-28) तीन दिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया है। नई दिल्‍ली, 26 अगस्त। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के प्रथम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ का निर्माण भारत को केंद्र में रखकर हुआ है और इसकी सार्थकता भारत के विश्वगुरु बनने में है। संघ कार्य की प्रेरणा संघ प्रार्थना के अंत में कहे जाने वाले “भारत माता की जय” से मिलती है। संघ के उत्थान की प्रक्रिया धीमी और लंबी रही है, जो आज भी निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि संघ भले हिन्दू शब्द का उपयोग करता है, लेकिन उसका मर्म ‘वसुधैव कुटुंबकम’ है। इसी क्रमिक विकास के तहत गांव, समाज और राष्ट्र को संघ अपना मानता है। संघ कार्य पूरी तरह स्वयंसेवकों द्वारा संचालित होता है। कार्यकर्ता स्वयं नए कार्यक...