
राष्ट्रोक्ति वेब डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा है कि चाइल्ड पोर्न को डाउनलोड करना और देखना अपराध है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि POCSO ऐक्ट में चाइल्ड पोर्नोग्राफ की जगह ‘चाइल्ड सेक्शुअली अब्यूजिव एंड एक्सप्लोइटेटिव मटीरियल (CSEAM) ‘ लिखने को कहा है।
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर कोई ऐसा कंटेंट डाउनलोड करता और देखता है, तो यह अपराध नहीं, जब तक कि नीयत इसे प्रसारित करने की न हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे कंटेंट का स्टोरेज, इसे डिलीट ना करना और इसकी शिकायत ना करना बताता है कि इसे प्रसारित करने की नीयत से स्टोर किया गया है। हाईकोर्ट ने ये केस खारिज करके अपने फैसले में गंभीर गलती की है। हम उसका फैसला रद्द करते हैं और केस को वापस सेशन कोर्ट भेजते हैं।
जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा-
“चाइल्ड पोर्नोग्राफी की जगह ‘चाइल्ड सेक्शुअल एक्सप्लॉएटेटिव एंड एब्यूसिव मटेरियल’ शब्द का इस्तेमाल किया जाए। केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर बदलाव करे। अदालतें भी इस शब्द का इस्तेमाल न करें।“
बेंच ने कहा कि चाइल्ड पोर्न को CSEAM कहने से लीगल फ्रेमवर्क और समज में बच्चों के शोषण के खिलाफ लड़ने का एक नया दृष्टिकोण बनेगा।
भारत में अश्लील वीडियो पर 3 कानून
- भारत में ऑनलाइन पोर्न देखना गैर-कानूनी नहीं है, लेकिन इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 में पोर्न वीडियो बनाने, पब्लिश करने और सर्कुलेट करने पर बैन है।
- इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 के सेक्शन 67 और 67A में इस तरह के अपराध करने वालों को 3 साल की जेल के साथ 5 लाख तक जुर्माना देने का भी प्रावधान है।
- IPC के सेक्शन-292, 293, 500, 506 में भी इससे जुड़े अपराध को रोकने के लिए कानूनी प्रावधान बनाए गए हैं। POCSO कानून के तहत कार्रवाई होती है।
देश में होगी सेक्स एजुकेशन की शुरुआत?
बेंच ने एक अहम टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार से देश भर में सेक्स एजुकेशन प्रोग्राम लागू करने का भी आह्वान किया है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार स्वास्थ्य और यौन शिक्षा के लिए एक व्यापक कार्यक्रम या तंत्र तैयार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करने पर विचार करे। पीठ ने कहा कि भारत में यौन शिक्षा के बारे में गलत धारणाएं व्यापक तौर पर अपनी पैठ बनाए हुए है। यहां लोग सामाजिक कलंक की वजह से यौन स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात करने से कतराते हैं, जिसके परिणामस्वरूप किशोरों के बीच यौन स्वास्थ्य को लेकर कई तरह की गलतफहमियां पैदा होती हैं और वे कई बार गलत रास्ते पर चले जाते हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि रूढ़िवादी समाज में माता-पिता और शिक्षकों समेत अधिकांश लोग सेक्स पर चर्चा करना गलत, अनैतिक या शर्मनाक महसूस करते हैं।
