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2 अक्‍टूबर : गाँधी जयंती …!  वर्धा : संघ के शीत शिविर में गाँधीजी और डॉक्टर हेडगेवार की ऐतिहासिक भेंट  

2 अक्‍टूबर : गाँधी जयंती …! वर्धा : संघ के शीत शिविर में गाँधीजी और डॉक्टर हेडगेवार की ऐतिहासिक भेंट  

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विपिन थपलियाल दिसम्बर 1934 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा वर्धा में आयोजित संघ का शीत शिविर... गाँधीजी के आगमन के कारण काफी चर्चा का विषय बन गया था ! डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी के सान्निध्य में रहते हुए संघ कार्य के लिए अपना जीवन खपाने वाले नारायण हरि पालकर ने 1960 में प्रकाशित अपनी पुस्तक “डॉक्टर हेडगेवार चरित” में महात्मा गाँधी और डॉक्टर हेडगेवार के बीच वर्धा में हुईं  इस ऐतिहासिक भेंट का वर्णन किया है... नारायण हरि पालकर की पुस्तक के अनुसार, 1934 में वर्धा में आयोजित शीत शिविर के निकट ही सेवाग्राम आश्रम में गांधीजी पधारे... शिविर में चल रही गतिविधियों को देखकर उनके मन में उत्सुकता हुई। यहाँ कौन सा कार्यक्रम या परिषद का सम्मेलन होने वाला है? उन्होने संबंधित कार्यकर्ताओं से चर्चा करके शिविर देखने का निश्चय किया। 22 दिसंबर 1934 को शिविर का उद्घाटन...
One Nation, One Election आज के भारत की आवश्यकता

One Nation, One Election आज के भारत की आवश्यकता

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किसी भी देश की लोकतंत्रीय प्रणाली में समय पर चुनाव कराना एक महत्वपूर्ण कार्य होता है। चुनाव किस प्रकार हों, समय पर हों एवं सही तरीके से हों, इसका बहुत महत्व होता है। परंतु देश में चुनाव बार बार होना भी अपने आप में ठीक स्थिति नहीं कही जा सकती है। विश्व के कई देशों, यथा स्वीडन, ब्राजील, बेलजियम, दक्षिण अफ्रीका, आदि में समस्त प्रकार के चुनाव एक साथ ही कराए जाने के नियम का पालन सफलतापूर्वक किया जा रहा है। प्रहलाद सबनानी राष्ट्रोक्ति वेब डेस्क : स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत में लोकसभा एवं विभिन्न प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही होते रहे हैं। परंतु केंद्र सरकार द्वारा कुछ विधानसभाओं को 1950 एवं 1960 के दशक में इनकी अवधि समाप्त होने के पूर्व ही भंग करने के चलते कुछ विधानसभाओं के चुनाव लोकसभा से अलग कराने की आवश्यकता पड़ी थी, उसके बाद से लोकसभा, विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं ...
29 SSeptember : करेंट अफेयर्स

29 SSeptember : करेंट अफेयर्स

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राष्ट्रोक्ति वेब डेस्क : Current Affairs तीन दिन बाद पृथ्वी को मिलेगा दूसरा चांद, दो महीने तक करेगा पृथ्वी की परिक्रमा धरती को एक नया चंद्रमा मिलने जा रहा है। वैज्ञानिकों ने इसे 2024 PT5 नाम दिया है। हालांकि, चंद्रमा की तरह हमेशा के लिए पृथ्वी के साथ नहीं रहेगा। यह क्षुद्रग्रह एक मिनी मून होगा, जो लगभग दो महीने तक पृथ्वी की परिक्रमा करेगा और उसके बाद यह अपने मूल गुरुत्वाकर्षण पर वापस लौट जाएगा। अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के रिसर्च नोट्स में सबसे पहले इस मिनी मून के बारे में बताया गया था। इसमें कहा गया था कि क्षुद्रग्रह 2024 PT5 29 सितम्बर (रविवार) से 25 नवम्बर के बीच लगभग दो महीने तक पृथ्वी की परिक्रमा करेगा। वहीं, नासा की गणना के अनुसार, अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वाले 29 सितम्बर को इसे देख सकेंगे। जानें कौन हैं शिगेरू इशिबा, जो बनने जा रहे जापान के नए प्रधानमंत्री पूर...
28 September :  करेंट अफेयर्स

28 September : करेंट अफेयर्स

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राष्ट्रोक्ति वेब डेस्क : Currant Affiars टेक महिंद्रा और ऑकलैंड विश्वविद्यालय ने एआई और क्वांटम अनुसंधान के लिए साझेदारी कीटेक महिंद्रा ने एआई, मशीन लर्निंग (एमएल) और क्वांटम कंप्यूटिंग में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ऑकलैंड विश्वविद्यालय (यूओए) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सहयोग स्वास्थ्य सेवा, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा और सरकार जैसे क्षेत्रों को लक्षित करेगा, स्नातक रोजगार क्षमता को बढ़ावा देने के लिए उद्योग-अकादमिक साझेदारी को बढ़ाएगा। फोकस क्षेत्रों में स्पाइकिंग न्यूरल नेटवर्क, 1-बिट बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी शामिल हैं, विशेष रूप से दवा की खोज और व्यक्तिगत डिजिटल बायोमार्कर जैसे स्वास्थ्य देखभाल अनुप्रयोगों में। भारत वैश्विक भ्रष्टाचार विरोधी गठबंधन के नेतृत्व में शामिल हुआभारत को 15 सदस्यीय ग्लोबई संचालन समिति के लिए चुना ...
1 अक्टूबर से शुरू होंगे कैलाश दर्शन, ओल्ड लिपुलेख दरें पर बनाए गए व्यू पॉइंट से हो सकेंगे दर्शन

1 अक्टूबर से शुरू होंगे कैलाश दर्शन, ओल्ड लिपुलेख दरें पर बनाए गए व्यू पॉइंट से हो सकेंगे दर्शन

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कैलाश पर्वत के दर्शन 1 अक्टूबर से शुरू होंगे, जिसमें 22 से 55 साल के श्रद्धालुओं को ही अनुमति होगी। यात्रा चार दिनों की होगी, जिसमें पिथौरागढ़ से गुंजी गांव, आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन शामिल हैं। प्रति व्यक्ति किराया 80,000 रुपये है Kailash Parvat Yatra : भारत से ही कैलाश पर्वत के दर्शन का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर है। हिंदुओं के लिए अत्यधिक पवित्र माने जाने वाले कैलाश पर्वत के दर्शन की यात्रा 1 अक्टूबर 2023 से शुरू होने जा रही है। इस यात्रा की घोषणा कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) ने की है। श्रद्धालुओं को पिथौरागढ़ जिले में स्थित ओल्ड लिपुलेख दरें पर बनाए गए व्यू पॉइंट से कैलाश पर्वत के अद्भुत नजारे का अनुभव कराया जाएगा। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के ओल्ड लिपुलेख की पहाड़ियों से MI-17 हेलिकॉप्टर से अगले हफ्ते से कैलाश पर्वत के दर्शन शुरू हो जाएंगे। इस यात्रा ...
3 परम रुद्र सुपर कंप्यूटर राष्ट्र को समर्पित

3 परम रुद्र सुपर कंप्यूटर राष्ट्र को समर्पित

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Param Rudra Super Computer: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 3 परम रुद्र सुपर कंप्यूटिंग सिस्टम और मौसम एवं जलवायु के लिए एक उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग सिस्टम का उद्घाटन किया। राष्ट्रोक्ति वेब डेस्क : प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत स्वदेशी रूप से विकसित 130 करोड़ रुपये के तीन परम रुद्र सुपर कंप्यूटर राष्ट्र को समर्पित किए। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने मौसम और जलवायु अनुसंधान के लिए तैयार एक उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणाली का भी उद्घाटन किया। इन सुपरकंप्यूटरों को अग्रणी वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए पुणे, दिल्ली और कोलकाता में लगाया गया है। पुणे में विशाल मीटर रेडियो टेलीस्कोप (जीएमआरटी), फास्ट रेडियो बर्स्ट (एफआरबी) और अन्य खगोलीय घटनाओं का पता लगाने के लिए सुपरकंप्यूटर का इस्तेमाल क...
श्राद्ध और पितृपक्ष का वैज्ञानिक महत्व

श्राद्ध और पितृपक्ष का वैज्ञानिक महत्व

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लेखक - डॉ. ओउम् प्रकाश पाण्डेय पितर का अर्थ होता है पालन या रक्षण करने वाला। पितर शब्द "पा रक्षणे" धातु से बना है। इसका अर्थ होता है पालन और रक्षण करने वाला। एकवचन में इसका प्रयोग करने से इसका अर्थ जन्म देने वाला पिता होता है और बहुवचन में प्रयोग करने से पितर यानी सभी पूर्वज होता है। इसलिए पितर पक्ष का अर्थ यही है कि हम सभी सातों पितरों का स्मरण करें। इसलिए इसमें सात पिंडों की व्यवस्था की जाती है, जिन्हें सप्तपिंडीं या सपिंडीं कहा जाता है। इन पिंडों को बाद में मिला दिया जाता है। ये पिंड भी पितरों की वृद्धावस्था के अनुसार क्रमश: घटते आकार में बनाए जाते थे। लेकिन आज इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। राष्‍ट्रोक्ति वेब डेस्‍क : श्राद्ध कर्म श्रद्धा का विषय है। यह पितरों के प्रति हमारी श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम है। श्राद्ध आत्मा के गमन जिसे संस्कृत में "प्रयन्ति" कहते हैं, से जुड़ा हुआ है। प...
संघ केवल संगठन मात्र नहीं, अपितु भारत के नवोत्थान का अभियान है – दत्तात्रेय होसबाले

संघ केवल संगठन मात्र नहीं, अपितु भारत के नवोत्थान का अभियान है – दत्तात्रेय होसबाले

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"संघ ही भारत में लोकतंत्र की सुरक्षा और सुरक्षा की गारंटी है। सेना और पुलिस के समान संघ देश का सुरक्षा कवच है।"-पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस जैसलमेर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने जैसलमेर प्रवास के दौरान बुधवार को शहीद पूनमसिंह स्टेडियम में बलिदानी पूनम सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। तत्पश्चात नगर एकत्रीकरण में स्वयंसेवकों का प्रबोधन में कहा कि संघ केवल एक संगठन मात्र नहीं है, अपितु भारत के नवोत्थान एवं सर्वप्रकार के पुनरोदय का महाभियान है। राष्ट्र जीवन का महत्वपूर्ण आंदोलन है। सेना और पुलिस के समान संघ देश का सुरक्षा कवच सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस ने संघ को परिभाषित करते हुए कहा है - संघ ही भारत में लोकतंत्र की सुरक्षा और सुरक्षा की गारंटी है। सेना और पुलिस के समान संघ देश का सुरक्षा कवच है। सर्वोच्च न्यायालय ...
एकात्म मानववाद के प्रवर्तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी

एकात्म मानववाद के प्रवर्तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी

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प्रो. सूर्य प्रकाश सेमवाल : समाज और राष्ट्र के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन आहूत करने वाले व्रती स्वयंसेवक, कुशल अर्थचिन्तक, अद्वितीय संगठन शिल्पी, आदर्श राजनेता और विख्यात पत्रकार पं. दीनदयाल उपाध्याय से कौन परिचित नहीं होगा, दीनदयाल जी का एकात्म मानववाद 77 वर्ष पूर्व भी उपयोगी और प्रासंगिक था और आज भी उतना ही सार्थक और अनुकरणीय है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के नंगला चंद्रभान गांव में एक सामान्य परिवार में हुआ था। पिता भगवतीप्रसाद उपाध्याय और माँ श्रीमती रामप्यारी अपने दुलारे को दीना कहकर पुकारते थे, यही दीना आगे चलकर बहुवस्तुस्पर्शिनी प्रतिभा और विराट व्यक्तितव के धनी राष्ट्र पुरुष सिद्ध हुए। नियति ने दीना को अल्पायु में ही माता-पिता के स्नेह और वात्सल्य से वंचित कर दिया। मात्र तीन वर्ष की आयु में पिता दुनिया छोडकर चले गए और 4 वर्ष पश्चात...
मंदिरों का सरकारीकरण नहीं, सामाजीकरण हो: डॉ. सुरेंद्र जैन

मंदिरों का सरकारीकरण नहीं, सामाजीकरण हो: डॉ. सुरेंद्र जैन

देश-दुनिया
नई दिल्ली। तिरुपति मंदिर में प्रसादम् को गम्भीर रूप से अपवित्र करने से आहत विश्व हिंदू परिषद ने आज कहा है कि अब मंदिरों का सरकारीकरण नहीं, समाजीकरण होना चाहिए। विहिप के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने यह भी कहा कि इस दुर्भाग्यजनक महापाप की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कर दोषियों को कठोरतम सजा होनी चाहिए। साथ ही भगवान के भक्तों को समाविष्ट कर ऐसी व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी चाहिए जिसमें इस तरह के षड्यंत्र का कोई संभावना न रह सके। उन्होंने कहा कि तिरुपति बालाजी मंदिर से मिलने वाले महाप्रसाद की पवित्रता के संबंध में आस्थावान हिंदुओं की अगाध श्रद्धा होती है। दुर्भाग्य से इस महाप्रसाद को निर्माण करने वाले घी में गाय व सूअर की चर्बी तथा मछली के तेल की मिलावट के अत्यंत दुखद और हृदय विदारक समाचार आ रहे हैं। पूरे देश का हिंदू समाज आक्रोशित है और हिंदुओं का क्रोध अलग-अलग रूप में प्रकट...